Monday, March 15, 2010

बाबा तेरे कितने रूप







गुरु गोबिंद दोउ खड़े काके लागु पाव । बलिहारी गुरु आपने गोबिंद दियो बताय।। यह दोहा तो मै पांचवी में पढ़ा था तब मेरे मन में साधू संतो के प्रति अटूट श्रद्धा थी । मुझे लगता था की यही बाबा है जो भव सागर से पर करते है । इन्हे देश दुनिया से मतलब नहीं होता । धीरे -धीरे उम्र के ३० बसंत गुजर गए । इस३० वर्षो दिल को छूने वाली अनेक घटनाये आई फिर भी बाबाओ पर विश्वास बना रहा । भगवा चोले की आड़ में सैक्स रैकेट चलाने वाले ढोंगी बाबा राजीव रंजन द्विवेदी की करतूतों को लोग भुला भी नहीं पाए थे कि राजधानी के एक मंदिर के पुजारी ने ऐसा कृत्य किया है जिसे सुनकर मानवता का सिर भी शर्म से झुक जाए। साकेत स्थितपुष्प विहार के सेक्टर एक में स्थित शिव मंदिर में पुजारी ने एक मंदबुद्धि युवती से दुष्कर्म किया। विश्वास और देश के लिए धार्मिक कई धार्मिक भगवान पुरुष है या कुछ अन्य में हाल ही में घोटाले उजागर होने के साथ मिलाने लगता है । जो अब इस सूची में और आ गया है जो स्वामी नित्यानंद एक सेक्स घोटाले का आरोप लगाया जा रहा है।
लोकप्रिय तमिल अभिनेत्री के साथ एक समझौता स्थिति में स्वामीजी दिखा फुटेज जारी की हैफुटेज २ मार्च को प्रसारित किया गया। रंजीता के रूप में महिला की पहचान। अब भी क्या बाबाओ पर विश्वास किया जाय। अब तो यही कहा जा सकता है की बाबा तेरे कितने रूप ।

Thursday, February 25, 2010

कर्ज के तले जन्म

एक अरब से अधिक आबादी और 37 प्रतिशत गरीबी के बीच भारत के हर नागरिक पर करीब 8,500 रुपये का विदेशी कर्ज है यानी अगर कोई बच्चा जन्म लेता है तो वह भी करीब इतने ही आर्थिक बोझ से दबा होगा। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा गुरूवार को लोकसभा में पेश आर्थिक समीक्षा में कहा गया कि भारत का विदेशी ऋण मार्च, 2009 के अंत में 224.59 अरब अमेरिकी डालर था, जो मार्च, 2008 के 224.41 अरब डालर के स्तर से कहीं अधिक है।इस आंकड़े की अगर एक एक व्यक्ति के आधार पर गणना की जाए तो हर नागरिक पर करीब 8,500 रुपये से अधिक का विदेशी कर्ज बैठता है। समीक्षा में कहा गया कि 2009-10 की पहली छमाही के दौरान कुल विदेशी ऋण 18.2 अरब अमेरिकी डालर बढ़कर 242.8 अरब अमेरिकी डालर हो गया। इसमें कहा गया कि दीर्घकालिक ऋण 19.2 अरब अमेरिकी डालर बढ़कर 200.4 अरब अमेरिकी डालर हो गया जबकि अल्पावधिक ऋण 98.50 करोड़ अमेरिकी डालर घटकर 42.2 अरब डालर हो गया। समीक्षा में कहा गया कि दीर्घावधि का ऋण का हिस्सा सितंबर, 2009 के अंत में 82.5 प्रतिशत रहा जो मार्च, 2009 के अंत में 80.7 प्रतिशत था।

Monday, December 21, 2009

बड़ी कठिन है डगर

उत्तर प्रदेश में भाजपा के नए अध्यक्ष की तलाश शुरू हो गई है। राज्य में सबसे खराब दौर से गुजर रही भाजपा को वहां पर ऐसे नेतृत्व की दरकार है जो उसकी खोई हुई जमीन व साख वापस ला सके। इस पद के लिए फिलहाल जिन नामों की चर्चा है, उनमें पूर्व मंत्री सूर्य प्रताप शाही व लखनऊ के मेयर रह चुके दिनेश चंद्र शर्मा प्रमुख हैं। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण करार देते हुए कहा है कि सबसे ज्यादा ताकत देने वाला यह प्रदेश उनके लिए अहम है। लोकसभा में उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा सांसद आते हैं। केंद्र में किसी पार्टी की सरकार बनने-बिगड़ने का खेल काफी हद तक इस राज्य में उस पार्टी की हैसियत पर निर्भर करता है। यहां भाजपा का हाल सबसे बुरा है। उत्तर प्रदेश के राजनाथ सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए भी हालात ठीक नहीं हो सके। अब गडकरी की सफलता भी उत्तर प्रदेश में उनकी सफलता से जुड़ गई है। गडकरी को सबसे पहले उत्तर प्रदेश के नए नेतृत्व के बारे में फैसला लेना है। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी के कार्यकाल में पार्टी को चुनावी सफलता तो नहीं ही मिली, वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलने में भी नाकामयाब रहे। लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष के भी उत्तर प्रदेश से होने के चलते त्रिपाठी की असफलताओं की तरफ किसी का खास ध्यान नहीं गया। सूत्रों के अनुसार प्रदेश की नई टीम अगले माह तक तैयार हो जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष के लिए फिलहाल शाही व शर्मा के नाम सबसे आगे हैं। शाही प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं और पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रभावी नेता माने जाते हैं। जबकि दिनेश शर्मा लखनऊ के मेयर रह चुके हैं। संघ की ओर से पार्टी नेतृत्व के लिए खींची गई आयु रेखा के हिसाब से शाही कमतर बैठते हैं। वह साठ से ऊपर के हैं, जबकि शर्मा इससे कम के हैं। तमाम पहलुओं पर चर्चा कर गडकरी को जल्द ही अंतिम निर्णय लेना होगा।

Saturday, December 19, 2009

डूबती नैया के खेवैया


भाजपा का कमान संघ के निर्देशानुसार एक युवा के हाथों में सौप दिया गया वह भी उस समय जब भाजपा में अंतर्कलह चरम पर है । जब पार्टी में केंद्रीय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक केवल बयानबाजी का बोलबाला है । सभी एक दुसरे पर छितकसी कर रहे है । ऐसे समय पर संजीवनी के स्थान पर एक और समस्या खड़ा हो गया ।कांग्रेस के राहुल में मुकाबला करने के लिए यह मराठी मानुस कितना कारगर साबित होगा । क्या हिंदी भाषी प्रदेशों में भाजपा की खोई जनाधार वापस आ पायेगी या वही आया राम गया राम साबित होगा । क्या भाजपा के धुरंधर इन्हें पचा पायेगे । क्या संघ का यह प्रयोग भाजपा को उचाई पर ले जाने में सफल होगा। आज नितिन गडकरी के विचारो से आडवानी जिस प्रकार दुखी हुए इससे तो लगता है की सायद आडवानी जी यही सोच रहे होगे को क्या इसी दिन के लिए भाजपा को सीचा था । इससे तो लगता है की भाजपा में अटल के बाद आडवानी युग कभी अंत हो गया ।

Monday, December 14, 2009

बंटवारे की राजनीति

एक बार 1947 में देश बटा जिसका खामियाजा भारत आज तक भुगत रहा है । यदि भारत -पाक के विभाजन न हुआ होता तो आज न कश्मीर मुद्दा होता न आतंकवाद पनपता। नेहरू और जिन्ना के विचारों पर महात्मा गाँधी कि मुहर लगना भारत के लिए नासूर बन गया है । देश के विभाजन के समय सरदार पटेल कितना पापड़ बेलकर देसी रियासतों को भारत में विलय कराए थे क्या इसी दिन के लिए कि इस भारत का तार-तार हो जाए। आज जिस तरह से छोटे राज्यों कि मांग चल रही है उससे तो लगता है कि एक दिन येसा भी आयेगा जब देस का हर जिला प्रदेश बन जाएगा, हर सांसद मुख्यमंत्री बन जाएगा । फिर संसद में केवल बुद्धिजीवी बैठकर तमासा देखेंगे । हर राज्य स्वतंत्रता कि मांग करेगा । तब भारत में कितने पाकिस्तान बनेगे इसका कल्पना नही किया जा सकता । वैसे ही भारत धर्म, जाति,भाषा,संप्रदाय ,गोरे काले अगड़े पिछड़े ,आतंकवाद, नक्सलवाद, छेत्रवाद का दंश झेल रहा है । अब आगे क्या होगा इसकी कल्पना नही कि जा सकती ।

Monday, November 16, 2009

अखंडता का खंड करने की साजिश

भारतीय संविधान में एकता और अखंडता का उल्लेख प्रस्तावना में दर्ज है। भारत का कोई भी नागरिक देश में कही भी निर्वाध रूप से रह सकता है और जीविकोपार्जन कर सकता है । लेकिन आज जो देश के अन्दर हिन्दी भाषियों के साथ हो रहा है । महाराष्ट्र विधान सभा के अन्दर मनसे द्वारा कृत्य किया गया उसे देखकर ऐशा लगा की जब भारत में भारतीय सुरछित नही है तो आस्ट्रेलिया में कैसे रह सकते है । जब आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रो पर हमला हुआ तो पूरा देश चिल्लाया लेकिन जब यही घटना महाराष्ट्र में हुआ तो देसवाशी मौन क्यो हो गए । क्या राज ठाकरे संविधान से ऊपर हो गये है या बाबा भीमराव आंबेडकर के संबिधान को भूल गये।

Friday, November 6, 2009

प्रभाष जी को अन्तिम प्रणाम

पत्रकारिता को दिए नूतन नित्य प्रकाश
कलमकार दमदार थे जोशी बड़े प्रभाष
जोशी बड़े प्रभाष, काल दे गया गवाही
हार न माने कभी लेखनी-वीर सिपाही
दिव्यदृष्टि में भी लाये जो बरबस आंसू
वह मसिजीवी ही पाये श्रद्धांजलि धांसू