Monday, December 21, 2009

बड़ी कठिन है डगर

उत्तर प्रदेश में भाजपा के नए अध्यक्ष की तलाश शुरू हो गई है। राज्य में सबसे खराब दौर से गुजर रही भाजपा को वहां पर ऐसे नेतृत्व की दरकार है जो उसकी खोई हुई जमीन व साख वापस ला सके। इस पद के लिए फिलहाल जिन नामों की चर्चा है, उनमें पूर्व मंत्री सूर्य प्रताप शाही व लखनऊ के मेयर रह चुके दिनेश चंद्र शर्मा प्रमुख हैं। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण करार देते हुए कहा है कि सबसे ज्यादा ताकत देने वाला यह प्रदेश उनके लिए अहम है। लोकसभा में उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा सांसद आते हैं। केंद्र में किसी पार्टी की सरकार बनने-बिगड़ने का खेल काफी हद तक इस राज्य में उस पार्टी की हैसियत पर निर्भर करता है। यहां भाजपा का हाल सबसे बुरा है। उत्तर प्रदेश के राजनाथ सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए भी हालात ठीक नहीं हो सके। अब गडकरी की सफलता भी उत्तर प्रदेश में उनकी सफलता से जुड़ गई है। गडकरी को सबसे पहले उत्तर प्रदेश के नए नेतृत्व के बारे में फैसला लेना है। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी के कार्यकाल में पार्टी को चुनावी सफलता तो नहीं ही मिली, वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलने में भी नाकामयाब रहे। लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष के भी उत्तर प्रदेश से होने के चलते त्रिपाठी की असफलताओं की तरफ किसी का खास ध्यान नहीं गया। सूत्रों के अनुसार प्रदेश की नई टीम अगले माह तक तैयार हो जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष के लिए फिलहाल शाही व शर्मा के नाम सबसे आगे हैं। शाही प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं और पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रभावी नेता माने जाते हैं। जबकि दिनेश शर्मा लखनऊ के मेयर रह चुके हैं। संघ की ओर से पार्टी नेतृत्व के लिए खींची गई आयु रेखा के हिसाब से शाही कमतर बैठते हैं। वह साठ से ऊपर के हैं, जबकि शर्मा इससे कम के हैं। तमाम पहलुओं पर चर्चा कर गडकरी को जल्द ही अंतिम निर्णय लेना होगा।

1 comment: