Thursday, February 25, 2010
कर्ज के तले जन्म
एक अरब से अधिक आबादी और 37 प्रतिशत गरीबी के बीच भारत के हर नागरिक पर करीब 8,500 रुपये का विदेशी कर्ज है यानी अगर कोई बच्चा जन्म लेता है तो वह भी करीब इतने ही आर्थिक बोझ से दबा होगा। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा गुरूवार को लोकसभा में पेश आर्थिक समीक्षा में कहा गया कि भारत का विदेशी ऋण मार्च, 2009 के अंत में 224.59 अरब अमेरिकी डालर था, जो मार्च, 2008 के 224.41 अरब डालर के स्तर से कहीं अधिक है।इस आंकड़े की अगर एक एक व्यक्ति के आधार पर गणना की जाए तो हर नागरिक पर करीब 8,500 रुपये से अधिक का विदेशी कर्ज बैठता है। समीक्षा में कहा गया कि 2009-10 की पहली छमाही के दौरान कुल विदेशी ऋण 18.2 अरब अमेरिकी डालर बढ़कर 242.8 अरब अमेरिकी डालर हो गया। इसमें कहा गया कि दीर्घकालिक ऋण 19.2 अरब अमेरिकी डालर बढ़कर 200.4 अरब अमेरिकी डालर हो गया जबकि अल्पावधिक ऋण 98.50 करोड़ अमेरिकी डालर घटकर 42.2 अरब डालर हो गया। समीक्षा में कहा गया कि दीर्घावधि का ऋण का हिस्सा सितंबर, 2009 के अंत में 82.5 प्रतिशत रहा जो मार्च, 2009 के अंत में 80.7 प्रतिशत था।
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