Monday, December 14, 2009
बंटवारे की राजनीति
एक बार 1947 में देश बटा जिसका खामियाजा भारत आज तक भुगत रहा है । यदि भारत -पाक के विभाजन न हुआ होता तो आज न कश्मीर मुद्दा होता न आतंकवाद पनपता। नेहरू और जिन्ना के विचारों पर महात्मा गाँधी कि मुहर लगना भारत के लिए नासूर बन गया है । देश के विभाजन के समय सरदार पटेल कितना पापड़ बेलकर देसी रियासतों को भारत में विलय कराए थे क्या इसी दिन के लिए कि इस भारत का तार-तार हो जाए। आज जिस तरह से छोटे राज्यों कि मांग चल रही है उससे तो लगता है कि एक दिन येसा भी आयेगा जब देस का हर जिला प्रदेश बन जाएगा, हर सांसद मुख्यमंत्री बन जाएगा । फिर संसद में केवल बुद्धिजीवी बैठकर तमासा देखेंगे । हर राज्य स्वतंत्रता कि मांग करेगा । तब भारत में कितने पाकिस्तान बनेगे इसका कल्पना नही किया जा सकता । वैसे ही भारत धर्म, जाति,भाषा,संप्रदाय ,गोरे काले अगड़े पिछड़े ,आतंकवाद, नक्सलवाद, छेत्रवाद का दंश झेल रहा है । अब आगे क्या होगा इसकी कल्पना नही कि जा सकती ।
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bhaai accha prayaas hai....kalam chalate raho !
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