Thursday, June 24, 2010

शुरू हुई बोलियां, चलने लगी गोलियां




एक बार फिर शांति का अलख जगाने दोनों पड़ोसी मुल्क बातचीत को राजी हो गए। सचिव स्टार की वार्ता के लिए तारीख तय हो गयी। दोनों देशो की तरह से बयानबाजी शुरू हो गयी । मुद्दा भी तय हो गया। बात होगी शांति की ,बात होगी आतंकवाद की , बात होगी सीमा सुरछा । अभी तयारी हो रही थी कि सीमा पर गोलाबारी शुरू हो गयी । इससे पाकिस्तान का इरादा साफ दिखने लगा । इसके बाद भी भारत अपने धैर्य का परिचय दे रहा है । सीमा पर गोली चल रही है । जवान मर रहे हैं । देश के पहरेदार वार्ता कर रहे हैं । एसे नापाक इरादे वाले देश के साथ कि प्रकार से विश्वासकर रहे हैं भारत के मशीहा । इससे लगता है कि भारत फिर कोई बड़ा धोखा खाने वाला है । इस बार पाक की तरफ से भारत के किस हिस्से में बम ब्लास्ट होगा , अब भारतियो को इसका उपहार मिलने वाला है।

Saturday, June 19, 2010

मुस्लिम वोट के चक्कर में कही हिन्दू वोट न घसक जाये

बिहार में उफान, राजनीति में हलचल, गठबंधन में दरार , विपछ को मुद्दा यानि पोस्टर विवाद । किसी नरेन्द्र मोदी के साथ नितीश कुमार का फोटो क्या छाप गया मानो पूरा बिहार नापाक हो गया । आखिर नितीश को मोदी से अलर्जी क्यों है ? बीजेपी नेता होने के कारण , गुजरात का मुख्यमंत्री होने के कारण , बिहार में गठबंधन होने के कारण, गुजरात के विकास के कारण यह सब नहीं है तो गोधरा कांड निश्चित है । गोधरा के कारण मोदी से नितीश को इतना इलर्गी है तो बिहार में सरकार क्यों बनाये । कोसी त्रासदी में मोदी नितीश को पैसा नहीं दिए थे वे उन पीडितो को पैसा दिए थे जो आज भी बेघर है । नितीश कुमार मुसलमानों के वोटबैंक के लिए पैसा लौटाए नितीश के अन्दर इतना स्वाभिमान है तो बीजेपी से गठबंधन क्यों नहीं तोड़ लेते ।यदि मुस्लिम प्रेम है तो हिन्दुओ के साथ हुए अत्याचारों का जबाब क्या है । मुस्लिम वोट के चक्कर में कही हिन्दू वोट न घसक जाये ।

Wednesday, June 16, 2010

कुछ तो करो नहीं तो सब बिक जायेगा

अगले वर्ष के शुरुआत में कुछ राज्यों में आसन्न विधानसभा चुनावों के बीच निर्वाचन आयोग ने बुधवार को चिंता जाहिर करने के साथ ही अधिकारियों को चुनाव संबंधी रिपोर्टो की कड़ी निगरानी करने के निर्देश दिए। निर्वाचन आयोग ने १६ जून २०१० को कहा कि पेड न्यूज की हालिया प्रवृत्ति स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संचालन के संबंध में चिंता पैदा कर रही है जो चिंताजनक अनुपात में है और गंभीर चुनावी अनियमितता है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को दिए अपने निर्देश में निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों से इस मामले में मीडिया पर कड़ी नजर रखने को भी कहा। आयोग ने कहा कि जिले में प्रसारित और प्रकाशित सभी समाचारपत्रों की कड़ी जांच पड़ताल के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी चुनाव की घोषणा होते ही जिला स्तरीय समितियों का गठन कर सकते हैं ताकि न्यूज कवरेज की आड़ में प्रकाशित होने वाले राजनीतिक विज्ञापनों का पता लगाया जा सके। निर्वाचन आयोग के इस पहल का हर कोई सराहना करता है लेकिन यह कितना लागू होगा उस पर सब की निगाहे है । मीडिया मालिको पर जब तक अंकुस नहीं लगेगा तब तक इस तरह का खेल होता रहेगा । निगरानी के बाद दंड की भी ब्यवस्था होनी चाहिए।