जौनपुर जिले के बरसठी ब्लाक में
सरसरा और कटवार दो गांव हैं। दोनों गांव एक दूसरे के पड़ोसी है। दोनों गांवों को
जोड़ने के लिए रेलवे लाइन ही सहारा है। सड़क मार्ग से दोनों गांवों की दूरी करीब 6
किमी हैं, वहीं रेल मार्ग से मात्र 3 किमी है। इलाहाबाद जौनपुर रेलमार्ग पर स्थित दोनों
गांवों में रेलवे स्टेशन हैं। सरसरा में बरसठी स्टेशन तो कटवार में कटवार बाजार
स्टेशन है। बरसठी स्टेशन जहां अंग्रेजों के जमाने में बना था वहीं कटवार बाजार
रेलवे हाल्ट महज दो साल पहले बना। कटवार बाजार हाल्ट रेलवे के बारे में कहानी बड़ी
मजेदार है। कटवार सहित असपास गांव के लोग जब ट्रेन कटवार पहुंचती थी तो चैन पुलिंग
कर रोक देते थे। इससे रेल प्रशासन काफी परेशान था। बाद में तत्कालीन सांसद स्वामी
चिन्मयानंद के प्रयास से कटवार को 2 साल पहले हाल्ट बनाया गया। ग्रामीणों ने
स्टेशन की घोषणा होते ही श्रमदान से वहां पर मिट्टी वगैरह डालकर स्टेशन का रूप दे
दिए हैं। दोनों गांव के लोग कभी पैदलSunday, January 17, 2016
दो पड़ोसी गांव दूरी महज 3किमी, जहां जाते हैं लोग ट्रेन से
जौनपुर जिले के बरसठी ब्लाक में
सरसरा और कटवार दो गांव हैं। दोनों गांव एक दूसरे के पड़ोसी है। दोनों गांवों को
जोड़ने के लिए रेलवे लाइन ही सहारा है। सड़क मार्ग से दोनों गांवों की दूरी करीब 6
किमी हैं, वहीं रेल मार्ग से मात्र 3 किमी है। इलाहाबाद जौनपुर रेलमार्ग पर स्थित दोनों
गांवों में रेलवे स्टेशन हैं। सरसरा में बरसठी स्टेशन तो कटवार में कटवार बाजार
स्टेशन है। बरसठी स्टेशन जहां अंग्रेजों के जमाने में बना था वहीं कटवार बाजार
रेलवे हाल्ट महज दो साल पहले बना। कटवार बाजार हाल्ट रेलवे के बारे में कहानी बड़ी
मजेदार है। कटवार सहित असपास गांव के लोग जब ट्रेन कटवार पहुंचती थी तो चैन पुलिंग
कर रोक देते थे। इससे रेल प्रशासन काफी परेशान था। बाद में तत्कालीन सांसद स्वामी
चिन्मयानंद के प्रयास से कटवार को 2 साल पहले हाल्ट बनाया गया। ग्रामीणों ने
स्टेशन की घोषणा होते ही श्रमदान से वहां पर मिट्टी वगैरह डालकर स्टेशन का रूप दे
दिए हैं। दोनों गांव के लोग कभी पैदलWednesday, October 7, 2015
बिहार चुनाव में रोज नए शब्दों का उदय
Wednesday, January 11, 2012
इंटरनेट, सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग
समाचार4मीडिया से साभार
Thursday, December 1, 2011
साध्वी चिदर्पिता की बाते निकली सच स्वामी चिन्मयानंद पर दुष्कर्म व हत्या मामला दर्ज
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद के विरूद्ध उनकी एक शिष्या ने दुष्कर्म एवं हत्या के प्रयास के आरोप की प्राथमिकी दर्ज कराई है।
पुलिस सूत्रों ने बताया है कि स्वामी चिन्मयानंद के मुमुक्षक आश्रम की पूर्व प्रबंधक एवं उनकी शिष्या ने शाहजहांपुर के जिला पुलिस अधीक्षक को दो दिन पहले भेजी एक तहरीर में उनके विरूद्ध दुष्कर्म एवं हत्या का प्रयास करने का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया कि शिष्या ने बुधवार को जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में उपस्थित होकर इस संबंध में अपना बयान भी दर्ज कराया, जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने चिन्मयानंद के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
उन्होंने बताया है कि इस मामले की जांच पुलिस निरीक्षक नरेंद्र पाल सिंह को सौंपी गई है। प्राथमिकी के अनुसार, वर्ष 2001 से वह राजनीतिक और आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित करने के लिए स्वामी चिन्मयानंद के दिल्ली आवास पर रह रही थी और उनके साथ अनेक स्थानों की यात्रा कर चुकी है। शिष्या ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2005 में स्वामी चिन्मयानंद के निर्देश पर उन्हें मुमुक्षक आश्रम लाया गया, जहां उन्होंने नशीला पदार्थ खिलाकर उसका यौन शोषण किया और सारे कृत्य की वीडियो फिल्म बना ली, जिसके बल पर उसे ब्लैकमेल किया गया और दो बार उसे जबरन गर्भपात भी कराना पड़ा। स्वामी चिन्मयानंद ने बहरहाल उनके विरूद्ध लगे आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया है।
Friday, March 11, 2011
सुनामी से मौत का मंजर

६ साल बाद एक फिर सुनामी की याद ताजा हुई । 11 मार्च 2011 जापान के उत्तरी पूर्वी इलाके में ८.९ की तीव्रता के भूकंप के बाद आई सुनामी ने भारी तबाही मचाई है । सबसे ज्यादा तबाही तटीय इलाके में हुई है। सेंडई इलाके में रीब 10 मीटर ऊंची उठी लहरों में कई मकान और गाडिय़ां बह गई। एक बड़ा पोत भी लहरों में बह गया। भूकंप के बाद सुनामी से करीब 200 शव तो सेंडई शहर में मिले थे। अभी कितने लोग मलवे में दबे है या समुद्र में बह गए उसकी जानकारी नही थी। इस खौफनाक मंजर से एक बार फिर दिल दहल गया। 26 दिसम्बर सन् 2004 की वह दिन फिर याद आ गया। जो अनेक सुन्दर जिन्दगियों के लिए खौफनाक मौत का पैगाम लेकर आई। समुद्र की सुनामी लहरों ने मौत का एक ऐसा विकट जाल बिछाया था, जिसमें हजारों लोगों के घर तबाह हो गए थे, हजारों जीवन बर्बाद हो गए थे।
उस समय भूकंप भूक·े कारण धरती की धुरी बुरी तरह से काँपने लगी थी। दुनिया के नक्शे से कुछ द्वीप गायब होने लगे थे तथा कुछ अपनी जगह से खिसकने भी लगे थे। सुनामी लहरों के कारण समुद्र तट पर बसे तमिलनाडु राज्य के तीन नगर—कुडलूर, नागपट्टिनम और वेलांगनी लगभग नष्ट ही हो चुके थे, साठ से ज्यादा ऐसे गाँव थे जिनका पृथ्वी पर कोई नामोनिशान बाकी नहीं रहा था। उन गाँवों को कच्ची-पक्की इमारतें कहाँ गईं—कुछ पता न चल सका। सबको समुद्र की सुनामी लहरें खा गईं। अनेक घर समुद्र की ऊँची-ऊँची लहरों की चपेट में आकर ध्वस्त हो गए। लोग-बाग अपनी जान बचाने के लिए समुद्र की लहरों से डरकर भागे परन्तु वे भागते कहाँ तक ? काल उनके सिर पर मँडराता हुआ, अपने आगोश में ले लिया।
आज जब जापान में सुनामी आयी तो भारत की कल्पना कर दिल कांप गया। इस दैविक आपदा में मारे गए बेकसूर लोग जिसका आज का दिन शुरू होने से पहले खत्म हो गई ।
Saturday, March 5, 2011
जौनपुर की मशहूर इमरती

जमाने में अपने इत्र और सुगंधित तेलों के लिए मशहूर रहे उत्तर प्रदेश के जौनपुर शहर की लजीज ‘इमरती’ अब देश-विदेश में धूम मचा रही है। शहर के नक्खास मुहल्ले के निवासी बेनीराम देवी प्रसाद ने सन 1855 से अपनी दुकान पर देशी घी की ‘इमरती’ बनाना शुरू किया था। उस समय देश गुलाम था फिर भी बेनीराम देवीप्रसाद ने अपनी इमरती की श्रेष्ठता एवं स्वाद बरकरार रखा। बेनी राम देवी प्रसाद के बाद उनके लड़के बैजनाथ प्रसाद, सीताराम व पुरषोत्तम दास ने अपना कारोबार बढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इन लोगों ने भी जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती की महक बनाए रखी।
इसके बाद विष्णु चन्द, प्रेमचन्द एवं जवाहरलाल ने इमरती को देश के बाहर भेजने का काम शुरू किया। अब जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती को बेनीराम देवी प्रसाद की चौथी पीढ़ी के वंशजों रवीन्द्रनाथ, गोविन्, धर्मवीर एवं विशाल ने पूरी तरह से संभाल लिया है। जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती की खासियत यह है कि यह हरे उड़द, देशी चीनी और देशी घी से लकड़ी की आंच पर ही बनाई जाती है। उड़द की दाल को सिल-बट्टे से पिसवाया जाता है।इमरती के लिए देशी चीनी आज भी बलिया से मंगाई जाती है। देशी चीनी और देशी घी में बनने के कारण इमरती गरम होने और ठंडी रहने पर भी मुलायम रहती है। बिना फ्रिज के इस इमरती को कम से कम दस दिन तक सही हालत में रखा जा सकता है। जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती 153 वर्ष पुरानी हो चुकी है और उसका स्वाद और गुणवत्ता अभी भी बरकरार है। जौनपुर से जो भी व्यक्ति अपनी रिश्तेदारी या मित्रों के यहां जाता है वह यहां की प्रसिद्ध बेनी की इमरती जरूर ले जाता है।
संसद में भी बंटी इमरती
स्वामी चिन्मयानंद जब जौनपुर से सांसद चुनकर गए तो वरिष्ठ भाजपा कलराज मिश्र के भती


