बरसठी। पुष्कर के बारे में कहा जाता है कि पूरे भारत में ब्रह्माजी का इकलौता मंदिर है, जहां ब्रह्माजी की पूजा की जाती है लेकिन यह गलत है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के बरसठी ब्लाक के सरसरा गांव में भी ब्रह्माजी की पूजा की जाती है। बरसठी रेलवे स्टेशन के समीप स्थित शिव मंदिर के पास भगवान ब्रह्माजी मूर्ति स्थापित है। भक्त पूजन जरूर करते हैं लेकिन यहां कोई मंदिर नहीं है।
ब्रह्माजी की मूर्ति खुले अासमान के नीचे स्थापित है। गांव वाले चौमुखा के नाम से इस मूर्ति की पूजा करते हैं। मूर्ति में चार मुख स्पष्ट है। जिसे चतुरानन अर्थात ब्रह्माजी कहा जा सकता है। मूर्ति स्थापना के समय ही लोगों को इस बात का ध्यान रहा होगा की जो कोई ब्रह्माजी का मंदिर बनवाएगा उसका विनाश हो जाएगा। इस बात को ध्यान में रखकर मंदिर का निर्माण नहीं हुअा है। खुले में ब्रह्माजी की मूर्ति स्थापित है। मूर्ति के बारे में तो किसी को नहीं पता है कि यह कितने साल पुरानी है। लेकिन बताया जाता है कि गांव के ही मिश्रा परिवार द्वारा इसकी स्थापना की गई है। पुरातत्व विभाग द्वारा यदि इसकी जांच की जाए तो मूर्ति कितनी पुरानी है पता चल सकती है।
क्यों नहीं होती ब्रह्माजी की पूजा
मान्यता है कि एक बार ब्रह्मा के मन में धरती की भलाई के लिए यज्ञ करने का ख्याल आया। यज्ञ के लिए जगह की तलाश करनी थी। लिहाजा उन्होंने अपनी बांह से निकले हुए कमल को धरती लोक की ओर भेज दिया। वो कमल इस शहर तक पहुंचा। कमल बगैर तालाब के नहीं रह सकता इसलिए यहां एक तालाब का निर्माण हुआ। यज्ञ के लिए ब्रह्मा यहां पहुंचे। लेकिन उनकी पत्नी सावित्री वक्त पर नहीं पहुंच पाईं। यज्ञ का समय निकल रहा था। लिहाजा ब्रह्मा जी ने एक स्थानीय ग्वाल बाला से शादी कर ली और यज्ञ में बैठ गए।
सावित्री थोड़ी देर से पहुंचीं। लेकिन यज्ञ में अपनी जगह पर किसी और औरत को देखकर गुस्से से पागल हो गईं। उन्होंने ब्रह्मा जी को शाप दिया कि जाओ इस पृथ्वी लोक में तुम्हारी कहीं पूजा नहीं होगी। यहां का जीवन तुम्हें कभी याद नहीं करेगा। सावित्री के इस रुप को देखकर सभी देवता लोग डर गए। उन्होंने उनसे विनती की कि अपना शाप वापस ले लीजिए। लेकिन उन्होंने नहीं लिया। जब गुस्सा ठंडा हुआ तो सावित्री ने कहा कि इस धरती पर सिर्फ पुष्कर में आपकी पूजा होगी। कोई भी दूसरा आपका मंदिर बनाएगा तो उसका विनाश हो जाएगा।
क्यों नहीं होती ब्रह्माजी की पूजा
मान्यता है कि एक बार ब्रह्मा के मन में धरती की भलाई के लिए यज्ञ करने का ख्याल आया। यज्ञ के लिए जगह की तलाश करनी थी। लिहाजा उन्होंने अपनी बांह से निकले हुए कमल को धरती लोक की ओर भेज दिया। वो कमल इस शहर तक पहुंचा। कमल बगैर तालाब के नहीं रह सकता इसलिए यहां एक तालाब का निर्माण हुआ। यज्ञ के लिए ब्रह्मा यहां पहुंचे। लेकिन उनकी पत्नी सावित्री वक्त पर नहीं पहुंच पाईं। यज्ञ का समय निकल रहा था। लिहाजा ब्रह्मा जी ने एक स्थानीय ग्वाल बाला से शादी कर ली और यज्ञ में बैठ गए।
सावित्री थोड़ी देर से पहुंचीं। लेकिन यज्ञ में अपनी जगह पर किसी और औरत को देखकर गुस्से से पागल हो गईं। उन्होंने ब्रह्मा जी को शाप दिया कि जाओ इस पृथ्वी लोक में तुम्हारी कहीं पूजा नहीं होगी। यहां का जीवन तुम्हें कभी याद नहीं करेगा। सावित्री के इस रुप को देखकर सभी देवता लोग डर गए। उन्होंने उनसे विनती की कि अपना शाप वापस ले लीजिए। लेकिन उन्होंने नहीं लिया। जब गुस्सा ठंडा हुआ तो सावित्री ने कहा कि इस धरती पर सिर्फ पुष्कर में आपकी पूजा होगी। कोई भी दूसरा आपका मंदिर बनाएगा तो उसका विनाश हो जाएगा।



