
६ साल बाद एक फिर सुनामी की याद ताजा हुई । 11 मार्च 2011 जापान के उत्तरी पूर्वी इलाके में ८.९ की तीव्रता के भूकंप के बाद आई सुनामी ने भारी तबाही मचाई है । सबसे ज्यादा तबाही तटीय इलाके में हुई है। सेंडई इलाके में रीब 10 मीटर ऊंची उठी लहरों में कई मकान और गाडिय़ां बह गई। एक बड़ा पोत भी लहरों में बह गया। भूकंप के बाद सुनामी से करीब 200 शव तो सेंडई शहर में मिले थे। अभी कितने लोग मलवे में दबे है या समुद्र में बह गए उसकी जानकारी नही थी। इस खौफनाक मंजर से एक बार फिर दिल दहल गया। 26 दिसम्बर सन् 2004 की वह दिन फिर याद आ गया। जो अनेक सुन्दर जिन्दगियों के लिए खौफनाक मौत का पैगाम लेकर आई। समुद्र की सुनामी लहरों ने मौत का एक ऐसा विकट जाल बिछाया था, जिसमें हजारों लोगों के घर तबाह हो गए थे, हजारों जीवन बर्बाद हो गए थे।
उस समय भूकंप भूक·े कारण धरती की धुरी बुरी तरह से काँपने लगी थी। दुनिया के नक्शे से कुछ द्वीप गायब होने लगे थे तथा कुछ अपनी जगह से खिसकने भी लगे थे। सुनामी लहरों के कारण समुद्र तट पर बसे तमिलनाडु राज्य के तीन नगर—कुडलूर, नागपट्टिनम और वेलांगनी लगभग नष्ट ही हो चुके थे, साठ से ज्यादा ऐसे गाँव थे जिनका पृथ्वी पर कोई नामोनिशान बाकी नहीं रहा था। उन गाँवों को कच्ची-पक्की इमारतें कहाँ गईं—कुछ पता न चल सका। सबको समुद्र की सुनामी लहरें खा गईं। अनेक घर समुद्र की ऊँची-ऊँची लहरों की चपेट में आकर ध्वस्त हो गए। लोग-बाग अपनी जान बचाने के लिए समुद्र की लहरों से डरकर भागे परन्तु वे भागते कहाँ तक ? काल उनके सिर पर मँडराता हुआ, अपने आगोश में ले लिया।
आज जब जापान में सुनामी आयी तो भारत की कल्पना कर दिल कांप गया। इस दैविक आपदा में मारे गए बेकसूर लोग जिसका आज का दिन शुरू होने से पहले खत्म हो गई ।

