Monday, January 24, 2011

पेड न्यूज की प्रवृत्ति जटिल समस्या


पेड न्यूज की प्रवृत्ति को एक जटिल समस्या करार देते हुए चुनाव आयोग ने २४ जनवरी २०११ को नईदिल्ली में कहा कि इसे मीडिया और राजनीतिक दलों द्वारा स्व नियमन के जरिए हल किया जा सकता है।

मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने २४ जनवरी को कहा कि चुनाव आयोग पेड न्यूज के माध्यम से मतदाताओं के मन पर पड़ने वाले अनुचित प्रभाव को लेकर चिंतित है। सही और निष्पक्ष सूचना पाने के मतदाताओं के अधिकार के संरक्षण की आवश्यकता है। कुरैशी ने राष्ट्रीय मतदाता दिवस और चुनाव आयोग की हीरक जयंति के समापन समारोह से एक दिन पहले यहां आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि हमारा अनुमान है कि पेड न्यूज की समस्या को मीडिया और राजनीतिक दलों द्वारा स्व विनियमन के जरिए बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है। उन्होंने पेड न्यूज के मामलों की जांच के लिए किए जा रहे उपायों की चर्चा करते हुए कहा कि आयोग ने सतर्कता प्रकोष्ठों का गठन किया है जो प्रकाशित और प्रसारित होने वाली खबरों पर कड़ी नजर रखते हैं। उन्होंने कहा कि हमने नोटिस जारी किए हैं और शिकायतों की सुनवाई शुरू की है। उन्होंने बताया कि हाल में एक राज्य में हुए विधानसभा चुनाव के बाद 86 नोटिस जारी किए गए। कई उम्मीदवारों ने आरोप को स्वीकार किया और पेड न्यूज पर हुए खर्च को चुनाव आयोग को दाखिल किए जाने वाले अपने विवरण में शामिल किया। हालांकि यह बस एक शुरूआत मात्र है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव प्रबंधकों द्वारा मतदाताओं को शिक्षित करने के काम को प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता और भारतीय चुनावों में धनबल की बढ़ती भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने चुनावों में धनबल के इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि यद्यपि चुनाव आयोग ने इस मामले में ढेर सारे उपाय किए हैं और उसे काफी सफलता भी मिली है फिर भी चुनावों में यह बड़ा मुद्दा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में एक उम्मीदवार के लिए पच्चीस लाख रुपये और विधानसभा चुनाव में दस लाख रूपए खर्च करने की अधिकतम सीमा तय है लेकिन गैर सरकारी अनुमानों के मुताबिक उम्मीदवार द्वारा इससे कई गुना ज्यादा राशि खर्च की जाती है।

कुरैशी ने बताया कि कुछ महीने पहले ही चुनाव आयोग में उम्मीदवारों द्वारा खर्च की जाने वाली राशि पर नजर रखने के लिए एक अलग विभाग बनाया गया है। उन्होंने कहा कि धन बल के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए हमारा संघर्ष जारी है, रास्ता लंबा है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनावों में मतदाताओं की हिस्सेदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि चुनाव प्रबंधकों ने मतदाता शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी है और चुनावी प्रक्रिया के प्रति शहरी लोगों और युवाओं की उदासीनता से निपटे जाने की जरूरत है। दैनिक जागरण से साभार