Thursday, December 1, 2011

साध्वी चिदर्पिता की बाते निकली सच स्वामी चिन्मयानंद पर दुष्कर्म व हत्या मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद के विरूद्ध उनकी एक शिष्या ने दुष्कर्म एवं हत्या के प्रयास के आरोप की प्राथमिकी दर्ज कराई है।

पुलिस सूत्रों ने बताया है कि स्वामी चिन्मयानंद के मुमुक्षक आश्रम की पूर्व प्रबंधक एवं उनकी शिष्या ने शाहजहांपुर के जिला पुलिस अधीक्षक को दो दिन पहले भेजी एक तहरीर में उनके विरूद्ध दुष्कर्म एवं हत्या का प्रयास करने का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया कि शिष्या ने बुधवार को जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में उपस्थित होकर इस संबंध में अपना बयान भी दर्ज कराया, जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने चिन्मयानंद के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

उन्होंने बताया है कि इस मामले की जांच पुलिस निरीक्षक नरेंद्र पाल सिंह को सौंपी गई है। प्राथमिकी के अनुसार, वर्ष 2001 से वह राजनीतिक और आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित करने के लिए स्वामी चिन्मयानंद के दिल्ली आवास पर रह रही थी और उनके साथ अनेक स्थानों की यात्रा कर चुकी है। शिष्या ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2005 में स्वामी चिन्मयानंद के निर्देश पर उन्हें मुमुक्षक आश्रम लाया गया, जहां उन्होंने नशीला पदार्थ खिलाकर उसका यौन शोषण किया और सारे कृत्य की वीडियो फिल्म बना ली, जिसके बल पर उसे ब्लैकमेल किया गया और दो बार उसे जबरन गर्भपात भी कराना पड़ा। स्वामी चिन्मयानंद ने बहरहाल उनके विरूद्ध लगे आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया है।


Friday, March 11, 2011

सुनामी से मौत का मंजर


६ साल बाद एक फिर सुनामी की याद ताजा हुई । 11 मार्च 2011 जापान के उत्तरी पूर्वी इलाके में ८.९ की तीव्रता के भूकंप के बाद आई सुनामी ने भारी तबाही मचाई है । सबसे ज्यादा तबाही तटीय इलाके में हुई है। सेंडई इलाके में रीब 10 मीटर ऊंची उठी लहरों में कई मकान और गाडिय़ां बह गई। एक बड़ा पोत भी लहरों में बह गया। भूकंप के बाद सुनामी से करीब 200 शव तो सेंडई शहर में मिले थे। अभी कितने लोग मलवे में दबे है या समुद्र में बह गए उसकी जानकारी नही थी। इस खौफनाक मंजर से एक बार फिर दिल दहल गया। 26 दिसम्बर सन् 2004 की वह दिन फिर याद आ गया। जो अनेक सुन्दर जिन्दगियों के लिए खौफनाक मौत का पैगाम लेकर आई। समुद्र की सुनामी लहरों ने मौत का एक ऐसा विकट जाल बिछाया था, जिसमें हजारों लोगों के घर तबाह हो गए थे, हजारों जीवन बर्बाद हो गए थे।
उस समय भूकंप भूक·े कारण धरती की धुरी बुरी तरह से काँपने लगी थी। दुनिया के नक्शे से कुछ द्वीप गायब होने लगे थे तथा कुछ अपनी जगह से खिसकने भी लगे थे। सुनामी लहरों के कारण समुद्र तट पर बसे तमिलनाडु राज्य के तीन नगर—कुडलूर, नागपट्टिनम और वेलांगनी लगभग नष्ट ही हो चुके थे, साठ से ज्यादा ऐसे गाँव थे जिनका पृथ्वी पर कोई नामोनिशान बाकी नहीं रहा था। उन गाँवों को कच्ची-पक्की इमारतें कहाँ गईं—कुछ पता न चल सका। सबको समुद्र की सुनामी लहरें खा गईं। अनेक घर समुद्र की ऊँची-ऊँची लहरों की चपेट में आकर ध्वस्त हो गए। लोग-बाग अपनी जान बचाने के लिए समुद्र की लहरों से डरकर भागे परन्तु वे भागते कहाँ तक ? काल उनके सिर पर मँडराता हुआ, अपने आगोश में ले लिया।
आज जब जापान में सुनामी आयी तो भारत की कल्पना कर दिल कांप गया। इस दैविक आपदा में मारे गए बेकसूर लोग जिसका आज का दिन शुरू होने से पहले खत्म हो गई ।

Saturday, March 5, 2011

meri kalam se: जौनपुर की मशहूर इमरती

meri kalam se: जौनपुर की मशहूर इमरती

जौनपुर की मशहूर इमरती


जमाने में अपने इत्र और सुगंधित तेलों के लिए मशहूर रहे उत्तर प्रदेश के जौनपुर शहर की लजीज ‘इमरती’ अब देश-विदेश में धूम मचा रही है। शहर के नक्खास मुहल्ले के निवासी बेनीराम देवी प्रसाद ने सन 1855 से अपनी दुकान पर देशी घी की ‘इमरती’ बनाना शुरू किया था। उस समय देश गुलाम था फिर भी बेनीराम देवीप्रसाद ने अपनी इमरती की श्रेष्ठता एवं स्वाद बरकरार रखा। बेनी राम देवी प्रसाद के बाद उनके लड़के बैजनाथ प्रसाद, सीताराम व पुरषोत्तम दास ने अपना कारोबार बढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इन लोगों ने भी जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती की महक बनाए रखी।
इसके बाद विष्णु चन्द, प्रेमचन्द एवं जवाहरलाल ने इमरती को देश के बाहर भेजने का काम शुरू किया। अब जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती को बेनीराम देवी प्रसाद की चौथी पीढ़ी के वंशजों रवीन्द्रनाथ, गोविन्, धर्मवीर एवं विशाल ने पूरी तरह से संभाल लिया है। जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती की खासियत यह है कि यह हरे उड़द, देशी चीनी और देशी घी से लकड़ी की आंच पर ही बनाई जाती है। उड़द की दाल को सिल-बट्टे से पिसवाया जाता है।इमरती के लिए देशी चीनी आज भी बलिया से मंगाई जाती है। देशी चीनी और देशी घी में बनने के कारण इमरती गरम होने और ठंडी रहने पर भी मुलायम रहती है। बिना फ्रिज के इस इमरती को कम से कम दस दिन तक सही हालत में रखा जा सकता है। जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती 153 वर्ष पुरानी हो चुकी है और उसका स्वा और गुणवत्ता अभी भी बरकरार है। जौनपुर से जो भी व्यक्ति अपनी रिश्तेदारी या मित्रों के यहां जाता है वह यहां की प्रसिद्ध बेनी की इमरती जरूर ले जाता है।
संसद में भी बंटी इमरती
स्वामी चिन्मयानंद जब जौनपुर से सांसद चुनकर गए तो वरिष्ठ भाजपा कलराज मिश्र के भतीजे ब्रह्मदेव मिश्र ने कई किलो इमरती लेकर दिल्ली गए। वह इमरती संसद भवन में बंटा गया । सांसदों ने स्वामी जी से पूछा की इस इमरती का नाम तो बहुत सुने थे इसका खासियत क्या है तो स्वामी जी ने तपाक से कहा की यह तो मुरली मनोहर जोशी ही बता सकते है क्योकि जोशी जी (इलाहाबाद) का पडोसी जिला जौनपुर है। जोशी जी ने कहा की मै भी बहुत नहीं जनता लेकिन इतना जरुर जनता हूँ कि यह गरम में भी नरम और नरम में भी नरम यानि ठंडे में भी नरम रहता है । जोशी जी के बात पर पूरा सदन ठहाका लगाया।

Monday, January 24, 2011

पेड न्यूज की प्रवृत्ति जटिल समस्या


पेड न्यूज की प्रवृत्ति को एक जटिल समस्या करार देते हुए चुनाव आयोग ने २४ जनवरी २०११ को नईदिल्ली में कहा कि इसे मीडिया और राजनीतिक दलों द्वारा स्व नियमन के जरिए हल किया जा सकता है।

मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने २४ जनवरी को कहा कि चुनाव आयोग पेड न्यूज के माध्यम से मतदाताओं के मन पर पड़ने वाले अनुचित प्रभाव को लेकर चिंतित है। सही और निष्पक्ष सूचना पाने के मतदाताओं के अधिकार के संरक्षण की आवश्यकता है। कुरैशी ने राष्ट्रीय मतदाता दिवस और चुनाव आयोग की हीरक जयंति के समापन समारोह से एक दिन पहले यहां आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि हमारा अनुमान है कि पेड न्यूज की समस्या को मीडिया और राजनीतिक दलों द्वारा स्व विनियमन के जरिए बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है। उन्होंने पेड न्यूज के मामलों की जांच के लिए किए जा रहे उपायों की चर्चा करते हुए कहा कि आयोग ने सतर्कता प्रकोष्ठों का गठन किया है जो प्रकाशित और प्रसारित होने वाली खबरों पर कड़ी नजर रखते हैं। उन्होंने कहा कि हमने नोटिस जारी किए हैं और शिकायतों की सुनवाई शुरू की है। उन्होंने बताया कि हाल में एक राज्य में हुए विधानसभा चुनाव के बाद 86 नोटिस जारी किए गए। कई उम्मीदवारों ने आरोप को स्वीकार किया और पेड न्यूज पर हुए खर्च को चुनाव आयोग को दाखिल किए जाने वाले अपने विवरण में शामिल किया। हालांकि यह बस एक शुरूआत मात्र है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव प्रबंधकों द्वारा मतदाताओं को शिक्षित करने के काम को प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता और भारतीय चुनावों में धनबल की बढ़ती भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने चुनावों में धनबल के इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि यद्यपि चुनाव आयोग ने इस मामले में ढेर सारे उपाय किए हैं और उसे काफी सफलता भी मिली है फिर भी चुनावों में यह बड़ा मुद्दा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में एक उम्मीदवार के लिए पच्चीस लाख रुपये और विधानसभा चुनाव में दस लाख रूपए खर्च करने की अधिकतम सीमा तय है लेकिन गैर सरकारी अनुमानों के मुताबिक उम्मीदवार द्वारा इससे कई गुना ज्यादा राशि खर्च की जाती है।

कुरैशी ने बताया कि कुछ महीने पहले ही चुनाव आयोग में उम्मीदवारों द्वारा खर्च की जाने वाली राशि पर नजर रखने के लिए एक अलग विभाग बनाया गया है। उन्होंने कहा कि धन बल के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए हमारा संघर्ष जारी है, रास्ता लंबा है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनावों में मतदाताओं की हिस्सेदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि चुनाव प्रबंधकों ने मतदाता शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी है और चुनावी प्रक्रिया के प्रति शहरी लोगों और युवाओं की उदासीनता से निपटे जाने की जरूरत है। दैनिक जागरण से साभार