जसवंत की भाजपा में ससम्मान वापसी की मांग
जसवंत सिंह का विवाद अभी भी भाजपा का पीछा नहीं छोड़ रहा है। पार्टी से बाहर किए जाने के बाद भाजपा संसदीय दल ने संसद की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष पद से जसवंत सिंह को हटाने कोशिशें तेज कर दी हैं तो दूसरी ओर, वरिष्ठ नेता प्यारेलाल खंडेलवाल ने उन्हें पार्टी में वापस लाने का राग छेड़ दिया है।
इधर, भाजपा आलाकमान की ओर से पद छोड़ने का अल्टीमेटम पाई राजस्थान विधानसभा में विधायक दल की नेता वसुंधरा राजे दिल्ली तो आईं, लेकिन भाजपा नेतृत्व से मिलने नहीं पहुंचीं।
खंडेलवाल ने पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को पत्र लिख कर जसवंत सिंह को ससम्मान पार्टी में वापस लेने का आग्रह किया है। दो दिन पहले लिखे इस पत्र में उन्होंने जसवंत सिंह प्रकरण को दुखद बताते हुए इसे पार्टी की प्रतिष्ठा के लिए आघात करार दिया। उन्होंने जसवंत के निष्कासन की कार्रवाई को कुछ नेताओं द्वारा की गई उनकी घेराबंदी का परिणाम बताया।
इधर, भाजपा अब जसवंत सिंह को लोक लेखा समिति का अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए मना रही है। एक बार समिति का अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद मामला लोकसभा अध्यक्ष के पास चला जाता है। ऐसे में अगर जसवंत खुद इस्तीफा नहीं देते हैं तो भाजपा को लोकसभा अध्यक्ष के यहां गुहार लगानी पड़ेगी। लोकसभा में उपनेता सुषमा स्वराज व राज्यसभा में उप नेता एस.एस. अहलूवालिया ने सोमवार को जसवंत से मुलाकात कर उन्हें इस्तीफे के लिए राजी करने की कोशिश की। सूत्रों के अनुसार भाजपा नेताओं ने कहा कि जसवंत को यह पद भाजपा सांसद रहते हुए पार्टी ने दिया था, इसलिए अब नैतिकता के नाते उन्हें ही पद छोड़ देना चाहिए।
इधर, खंडेलवाल की चिट्ठी भाजपा में जसवंत सिंह को लेकर नए विवाद के संकेत दे रही है। खंडेलवाल ने लिखा है कि पार्टी ने जिस तरह अरुण शौरी के मामले में संयम से काम लिया, वैसा ही संयम जसवंत के मामले में भी दिखाए जाने की जरूरत थी। खंडेलवाल ने पार्टी अध्यक्ष से आग्रह किया है कि पहले तो जसवंत सिंह की किताब पर गुजरात में लगा प्रतिबंध हटाया जाए और उसके बाद उन्हें ससम्मान पार्टी में वापस लाया जाए। खंडेलवाल ने इस पत्र की प्रति संघ प्रमुख मोहन भागवत, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली, रामलाल, डा. मुरली मनोहर जोशी, सुरेश सोनी व जसवंत सिंह को भेजी है।
दूसरी तरफ, वसुंधरा राजे का मामला अभी भी अनसुलझा है। आलाकमान के अल्टीमेटम के बाद राजे को सोमवार को वेंकैया नायडू से मिल कर इस्तीफा देना था। वह दिल्ली आ भी गई थीं, लेकिन वायरल बुखार से पीड़ित होने के कारण वह नायडू से नहीं मिल सकीं। उनके बेटे व सांसद दुष्यंत सिंह ने वेंकैया से मुलाकात कर वसुंधरा के न आ पाने की जानकारी दी।
राजे की जगह नए नेता के चुनाव पर चर्चा के लिए राजस्थान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ओम माथुर भी दिल्ली पहुंच चुके हैं। अब इस मामले पर मंगलवार को चर्चा होने की संभावना है।
Monday, August 31, 2009
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